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"हम प्रसून हैं अपने मन के" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

>> 10 February, 2012

हम प्रसून हैं अपने मन के
[DSCI0030.JPG]
गन्घ भरे हम सुमन चमन के।
हम प्रसून हैं अपने मन के।।

आँगन में खिलते-मुस्काते,
देशभक्ति की अलख जगाते,
हम हैं कर्णधार उपवन के।
हम प्रसून हैं अपने मन के।।

जो दुनिया में सबसे न्यारी,
जन्मभूमि वो हमको प्यारी,
उगते रवि हम नीलगगन के।
हम प्रसून हैं अपने मन के।।

ऊँचे पर्वत और समन्दर,
रत्न भरे हैं जिनके अन्दर,
पाठ पढ़ाते जो जीवन के।
हम प्रसून हैं अपने मन के।।

हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई हैं,
आपस में भाई-भाई हैं,
इक माला के हम हैं मनके।
हम प्रसून हैं अपने मन के।।

15 comments:

अशोक कुमार पाण्डेय 10 फरवरी 2012 7:04 pm  

बढ़िया है सर

अरूण साथी 10 फरवरी 2012 7:09 pm  

khoob....hona hi chahiye aapna prashoon.....apne maan ka....

ऋता शेखर मधु 10 फरवरी 2012 7:12 pm  

बहुत बढ़िया लयबद्ध कविता|

Kailash Sharma 10 फरवरी 2012 7:51 pm  

बहुत सुंदर....

Maheshwari kaneri 10 फरवरी 2012 8:55 pm  

बहुत बढ़िया....

Maheshwari kaneri 10 फरवरी 2012 8:55 pm  

बहुत बढ़िया....

डॉ॰ मोनिका शर्मा 10 फरवरी 2012 9:39 pm  

सुंदर , मर्मस्पर्शी रचना

संगीता स्वरुप ( गीत ) 10 फरवरी 2012 10:43 pm  

बच्चे मन के राजा ही होते हैं .. सुन्दर कविता

देवेन्द्र पाण्डेय 11 फरवरी 2012 3:08 pm  

सुंदर।

वन्दना 11 फरवरी 2012 6:51 pm  

बहुत सुन्दर बाल कविता।

कविता रावत 11 फरवरी 2012 7:21 pm  

बहुत सुन्दर बालरचना!

vandana 12 फरवरी 2012 5:48 am  

बढ़िया देशभक्ति रचना

Akshitaa (Pakhi) 13 फरवरी 2012 4:55 pm  

हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई हैं,आपस में भाई-भाई हैं,इक माला के हम हैं मनके।हम प्रसून हैं अपने मन के।।

...बहुत सुन्दर बाल-गीत..बधाई.
_____________

'पाखी की दुनिया' में जरुर मिलिएगा 'अपूर्वा' से..

Surendra shukla" Bhramar"5 20 फरवरी 2012 9:29 pm  

आँगन में खिलते-मुस्काते,
देशभक्ति की अलख जगाते,
हम हैं कर्णधार उपवन के।
हम प्रसून हैं अपने मन के।।
आदरणीय शास्त्री जी ..सुन्दर सन्देश देती रचना ...बच्चों को अलख जगाने का मन्त्र ..खूबसूरत ...
जय श्री राधे
भ्रमर 5

India Darpan 25 मार्च 2012 1:53 pm  

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


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